हरियाणा सरकार ने HIV/AIDS नियंत्रण के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में हरियाणा मानव इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस और एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 की धारा 49(1) के तहत राज्य नियमों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। ये नए नियम “हरियाणा मानव इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस और एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम नियम, 2025” के नाम से जाने जाएंगे।
नए नियमों के अनुसार, हरियाणा सरकार अपने छह प्रशासनिक प्रभागों – रोहतक, हिसार, करनाल, गुरुग्राम, फरीदाबाद और अंबाला – के आयुक्तों को लोकपाल नियुक्त करेगी। ये लोकपाल HIV/AIDS से प्रभावित व्यक्तियों की शिकायतों का समाधान करेंगे और संबंधित जिले के सिविल सर्जन का समर्थन प्राप्त करेंगे।
सरकार राज्य में सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों जैसे उप-स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नागरिक अस्पताल, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में निःशुल्क नैदानिक सेवाएं सुनिश्चित करेगी। साथ ही, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार, एआरटी, एफआईएआरटी और एलएआरटी केंद्रों पर HIV पॉजिटिव मरीजों को मुफ्त एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
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प्राइवेट मेडिकल सेक्टर को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा ताकि HIV पॉजिटिव लोगों को भेदभाव से मुक्त उपचार और नैदानिक सेवाएं मिल सकें। निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिए जाएंगे कि वे सभी HIV मामलों की जानकारी निकटतम एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र या सरकारी अस्पताल को दें, साथ ही मरीजों के मानवाधिकारों और गोपनीयता का सम्मान करें।
राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी को केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमणों के निदान और उपचार के लिए आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इन नियमों का उद्देश्य HIV से प्रभावित बच्चों और व्यक्तियों के अधिकारों और सुरक्षा को मजबूत करना है, साथ ही लोकपाल की जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना भी है।
हरियाणा सरकार का यह कदम HIV/AIDS नियंत्रण में सुधार लाने और प्रभावित लोगों को बेहतर सेवाएं देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।