गुजरात में AAP प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला नहीं, इसुदान गढ़वी ने किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्योगों के हित में अमेरिकी ट्रेड डील पर सवाल उठाए।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी, विधायक गोपाल इटालिया, प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया, फ्रंटल संगठन प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण राम, प्रदेश युवा अध्यक्ष ब्रिजराज सोलंकी, फ्रंटल संगठन प्रदेश महामंत्री सामत गढ़वी, मध्य जोन कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. ज्वेल वसरा, प्रदेश उपाध्यक्ष गौरी देसाई तथा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता डॉ. करन बारोट सहित प्रदेश के पदाधिकारी आज राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे। उससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मीडिया को संबोधित करते हुए AAP नेता इसुदान गढ़वी ने कहा कि आम आदमी पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी है और पांच विधायकों के साथ लगातार जनता के बीच रहकर लोगों के मुद्दे उठा रही है, इसके बावजूद हमें राज्यपाल से मिलने के लिए समय नहीं दिया जा रहा है। पहले राजकोट गेम ज़ोन मामले में पहला पत्र दिया गया था। उसके बाद विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों को लेकर राज्य सरकार को छुते मुद्दों पर पत्र दिया गया और चैतर वसावा के द्वारा भी अलग से पत्र लिखा गया था। इसके बावजूद मुलाकात के लिए समय नहीं दिया गया। लेकिन आज पार्टी ने तय किया है कि वह आधिकारिक रूप से आवेदन पत्र सौंपेगी।
AAP नेता इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि गुजरात की जनता के सवालों पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी और विशेष रूप से किसानों, वंचितों, गरीबों, शोषितों, छोटे उद्योगकारों और पशुपालकों के हित के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील से किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्योगकारों को गंभीर नुकसान होने की आशंका है। क्या एपस्टीन फाइल या अडाणी के मामले के दबाव में यह ट्रेड डील की गई है? उनके अनुसार पहले अमेरिकी उत्पादों पर लगभग 30 प्रतिशत तक टैक्स लगता था, जिसे शून्य किया होने वाला है, जबकि भारतीय उत्पादों पर अधिक कर का भार आ सकता है। वर्तमान में किसानों को फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है, फसल बीमा का सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा है और सिंचाई तथा बिजली के खर्च में बढ़ोतरी हुई है। ऐसी स्थिति में यदि सब्सिडी वाले विदेशी कृषि उत्पाद बाजार में आएंगे तो स्थानीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में किसानों को 54 लाख की सब्सिडी दी जाती है, जिससे उनका उत्पादन खर्च कम रहता है। परिणामस्वरूप उनके उत्पाद यहां सस्ते पड़ेंगे और स्थानीय बाजार में कीमतें गिर सकती हैं। पशुपालन क्षेत्र के बारे में उन्होंने कहा कि दूध के दामों में स्थिरता नहीं है, नकली दूध का कारोबार बढ़ रहा है और कई स्थानों पर संघों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। ऐसे में यदि विदेशी डेयरी उत्पादों को छूट दी जाएगी तो स्थानीय पशुपालकों को और नुकसान हो सकता है।
इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि अमेरिका में गायों को नॉनवेज आहार दिया जाता है और उसी दूध से बने उत्पाद भारत आएंगे, यह भाजपा सरकार क्या कर रही है? जो लोग सात्विक हैं और नॉनवेज नहीं खाते, क्या उन्हें अब भाजपा नॉनवेज वाला दूध पिलाएगी? यदि अभी गुजरात में AAP की सरकार होती तो वर्तमान कीमत से ₹15 प्रति लीटर अधिक पशुपालकों को मिलता। जब तक भाजपा सत्ता में रहेगी, तब तक हमारे किसान, पशुपालक और छोटे उद्योग पतन की ओर जाएंगे। सरकार जवाब दे कि अमेरिकी किसानों के उत्पाद भारत में क्यों आ रहे हैं? AAP सरकार तथा निजी व्यापारी भी पंजाब में किसानों से समर्थन मूल्य पर फसल खरीदते हैं। जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक जाति-समाज के नेताओं के कहने पर वोट देने का खामियाजा किसान और पशुपालक भुगत रहे हैं, आगामी स्थानीय स्वराज चुनाव में किसान, पशुपालक और छोटे उद्योगकार मुद्दों की राजनीति करने वालों को वोट दें।