राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में आयोजित लोक कला संगम 2026 का भव्य उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को एक मंच पर प्रस्तुत करना था। समारोह में कलाकारों, नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों से आए दर्शकों की भारी उपस्थिति रही।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उद्घाटन के अवसर पर कहा कि राजस्थान की लोक कला हमारी पहचान है और इसे संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस आयोजन के माध्यम से कलाकारों को अपने हुनर का प्रदर्शन करने और लोक कला की सुंदरता को लोगों तक पहुँचाने का अवसर मिलेगा।
लोक कला संगम में विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम में राजस्थान के प्रतिष्ठित लोक नृत्य और संगीत की झलक देखने को मिली। कलाकारों ने घूमर, कालबेलिया, भवाई और ढोल नृत्य जैसी प्रस्तुतियाँ दीं। इसके साथ ही पारंपरिक शिल्प जैसे बुनाई, मिट्टी के बर्तन, हस्तनिर्मित गहने और बैग भी प्रदर्शित किए गए। दर्शक इन स्टॉलों पर रुचि दिखाते हुए कई वस्तुएँ खरीदते भी नजर आए।
युवाओं और परिवारों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की और तालियों से उत्साह बढ़ाया। लोक गीत और संगीत ने समग्र माहौल को जीवंत और उत्साही बनाया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संदेश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोक कला किसी भी समाज की आत्मा होती है। राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति ने सदियों से लोगों को आकर्षित किया है और यह कला न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऐसे आयोजनों के माध्यम से कलाकारों को आर्थिक और पेशेवर समर्थन प्रदान कर रही है।
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं को भी लोक कला से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और कहा कि अगर नई पीढ़ी अपनी संस्कृति को समझेगी और अपनाएगी, तो हमारी सांस्कृतिक विरासत और मजबूत होगी।
कलाकारों और दर्शकों की सहभागिता
लोक कला संगम में शामिल कलाकारों ने कहा कि यह मंच उन्हें नए दर्शकों से जोड़ता है और अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करता है। माता-पिता अपने बच्चों को सांस्कृतिक शिक्षा देने के लिए लाए और समारोह का आनंद लिया। कई स्थानीय परिवारों ने बताया कि यह पहला अवसर था जब उन्होंने इतनी विविध लोक कला प्रस्तुतियाँ देखीं।
अनुभव और संदेश
कार्यक्रम के दौरान दर्शकों का उत्साह साफ देखा गया। स्टेज पर कलाकारों की प्रस्तुतियाँ देखने के लिए लोग समय से पहले पहुंचे और लोक गीत तथा ढोल की थाप पर नृत्य करते भी दिखे। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि राजस्थान की लोक संस्कृति आज भी जीवंत है और इसे संरक्षित करने के लिए सरकार, कलाकार और जनता मिलकर काम कर रहे हैं।
लोक कला संगम 2026 ने कला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत का उत्कृष्ट संगम प्रस्तुत किया, जिसने सभी उपस्थित लोगों को आनंदित और प्रेरित किया।