Rohit Shetty Firing Case: रोहित शेट्टी फायरिंग केस में बिश्नोई गैंग का ‘डेड ड्रॉप’ मॉडल सामने आया। पुलिस अब मुख्य शूटर की तलाश में जुटी, आरोपी पुणे से हथियार लाए थे।
Rohit Shetty Firing Case: मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में रोहित शेट्टी के घर फायरिंग मामले से जुड़े लॉरेंस बिश्नोई गैंग की साजिशों का खुलासा लगातार हो रहा है। ताजा जांच में पता चला है कि गैंग ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए ‘डेड ड्रॉप’ तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।
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डेड ड्रॉप तकनीक का तरीका (Rohit Shetty Firing Case)
सूत्रों के अनुसार मास्टरमाइंड शुभम लोनकर ने पूरी योजना इस तरह तैयार की थी कि अगर कोई भी कड़ी टूटे तो पूरी साजिश का पता न चले। आरोपी स्वप्निल सकट और सिद्धार्थ येनपुरे पुणे से स्कूटी लेकर मुंबई पहुंचे, लेकिन उन्होंने मुख्य शूटर से कभी आमना-सामना नहीं किया।
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साजिश की योजना: आरोपियों ने स्कूटी को सुनसान स्थान पर पार्क किया और तुरंत पुणे लौट गए।
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हथियार की डिलीवरी: वारदात में इस्तेमाल पिस्टल स्कूटी की डिक्की में छिपाकर रखी गई।
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चेन कटिंग: मुख्य शूटर अकेले जाकर हथियार और स्कूटी लेकर चला गया, जिससे डिलीवरी देने वालों को उसकी पहचान नहीं हुई।
हथियार का पुणे कनेक्शन
जांच में यह भी सामने आया कि फायरिंग में इस्तेमाल पिस्टल पुणे से खरीदी गई थी। पुलिस आरोपी आसाराम फासले से हथियार की सप्लाई चेन की पड़ताल कर रही है। बैलिस्टिक एक्सपर्ट्स यह जांच कर रहे हैं कि क्या इसी पिस्टल का इस्तेमाल पहले किसी अन्य वारदात में हुआ था।
गैंग की रणनीति और आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों में कई शुभम लोनकर के बचपन के दोस्त हैं, जो उसकी आपराधिक छवि से प्रभावित होकर इस साजिश का हिस्सा बने। स्वप्निल सकट पर पहले से आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज है, जबकि अन्य आरोपियों का कोई बड़ा क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं मिला।
मुख्य शूटर अब भी फरार
पुलिस अब तक मुख्य शूटर को पकड़ने में सफल नहीं हो पाई है। अलग-अलग मॉड्यूल में काम करने वाली बिश्नोई गैंग की रणनीति जांच को और पेचीदा बना रही है। मुंबई पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती वही शूटर है, जो इस पूरी साजिश की अंतिम कड़ी है।