DELHI NEWS : अब दिल्ली में घरों और व्यावसायिक इकाइयों से कचरा उठवाने के लिए लोगों को फीस चुकानी होगी। इस नई व्यवस्था की शुरुआत एमसीडी कमिश्नर ने की है। इसके तहत दिल्ली के निवासियों को हर महीने 50 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का भुगतान करना पड़ेगा, जो प्रॉपर्टी के प्रकार और आकार पर निर्भर करेगा।
अब देश की राजधानी दिल्ली में लाखों नागरिकों को अपने घरों और व्यवसायिक परिसरों से कचरा उठवाने के लिए शुल्क चुकाना होगा। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने इस शुल्क को प्रॉपर्टी टैक्स से जोड़ने का निर्णय लिया है। यह शुल्क ऑनलाइन टैक्स भरते समय स्वतः जुड़ जाएगा। इसकी राशि हर महीने कम से कम 50 रुपये और अधिकतम 5000 रुपये तक हो सकती है। हालांकि इस निर्णय पर राजनीतिक हलकों में विरोध की आवाज़ें उठने लगी हैं।
यह फैसला नगर निगम अधिकारियों द्वारा ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016’ के तहत लिया गया है। ये नियम पूरे देश में 8 अप्रैल 2016 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा लागू किए गए थे। दिल्ली सरकार ने जनवरी 2018 में उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। इसके अंतर्गत आवासीय और व्यावसायिक परिसरों से अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार यूज़र चार्ज वसूलने का प्रावधान किया गया था। इसके बाद उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली नगर निगमों ने 2019 और 2020 में सदन में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी और अब इसे अमल में लाया गया है।
जानें क्या होंगी वसूली की दरें:
इस नियम के तहत यूज़र चार्ज की राशि संपत्ति के आकार और उसके उपयोग के अनुसार निर्धारित की गई है।
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50 वर्ग मीटर तक के मकानों के लिए 50 रुपये
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50 से 200 वर्ग मीटर के लिए 100 रुपये
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200 वर्ग मीटर से अधिक के लिए 200 रुपये प्रति माह
वहीं, दुकानों, ढाबों, रेस्तरां, होटलों, गेस्ट हाउस, क्लीनिक और कोचिंग सेंटर जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 100 से लेकर 5000 रुपये प्रतिमाह तक कचरा उठाने का शुल्क वसूला जाएगा।
महापौर ने जताया फैसला लागू करने पर ऐतराज़
दिल्ली में कचरा वसूली शुल्क लागू किए जाने के फैसले का महापौर महेश कुमार खींची, उप महापौर रविंद्र भारद्वाज और सदन नेता मुकेश गोयल ने कड़ा विरोध किया है। सिविक सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महापौर ने निगम आयुक्त पर आरोप लगाया कि यह निर्णय सदन की अनुमति के बिना ही लागू कर दिया गया, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे पर सदन में चर्चा और स्वीकृति आवश्यक थी, लेकिन वह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
विपक्ष ने फैसले को बताया अनुचित
विपक्षी नेताओं का कहना है कि पहले से ही कूड़ा उठाने वाली एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियां सही तरीके से नहीं निभा रही हैं और कई इलाकों में तो टेंडर की अवधि भी समाप्त हो चुकी है। ऐसे में यूज़र चार्ज लागू करना आम जनता के साथ नाइंसाफी है।