Online Shopping : अगर कोई व्यक्ति बिना जरूरत बार-बार खरीदारी करता है और चाहकर भी खुद को रोक नहीं पाता, तो यह केवल एक “बुरी आदत” नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या हो सकती है। जरूरत से ज्यादा ऑनलाइन शॉपिंग की लत व्यक्ति को Buying Shopping Disorder (BSD) या Compulsive Buying Disorder (CBD) की ओर धकेल सकती है।
आजकल बाजार की भीड़-भाड़ से बचने और सुविधा के नाम पर शॉपिंग ऐप्स ने हमारी ज़िंदगी आसान बना दी है। लेकिन इन्हीं ऐप्स के ज़रिए कंपनियां मार्केटिंग का ऐसा जाल बिछा देती हैं कि लोग लत का शिकार हो जाते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग की आदत लंबे समय में मानसिक सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
Online Shopping लत क्यों बन जाती है?
जब लोग अकेलापन महसूस करते हैं या तनाव से उबरना चाहते हैं, तो वे बार-बार ऑनलाइन कुछ न कुछ ऑर्डर करते हैं। शुरुआत में यह आनंद देता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लत बन जाती है। ऐसा व्यक्ति हमेशा शॉपिंग के बारे में सोचता है और खरीदने की इच्छा को रोक नहीं पाता।
क्या है Buying Shopping Disorder?
इसे मेडिकल भाषा में Oniomania कहा जाता है। इसमें व्यक्ति ज़रूरत न होने पर भी लगातार और बेकाबू होकर चीजें खरीदता है ,चाहे उसके पास पैसे हों या न हों। यह सिर्फ शौक नहीं, बल्कि मानसिक और आर्थिक रूप से नुकसानदेह आदत बन जाती है।
इसके लक्षण क्या हैं?
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बार-बार शॉपिंग ऐप्स खोलना
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बिना ज़रूरत चीजें खरीदना
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खरीदने के बाद पछतावा या अपराधबोध
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मूड सुधारने के लिए शॉपिंग का सहारा लेना
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कर्ज या क्रेडिट कार्ड का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल
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खरीदी गई चीजों का इस्तेमाल न करना या छिपाकर रखना
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आर्थिक संकट के बावजूद शॉपिंग न रोक पाना
कैसे बचें इस डिसऑर्डर से?
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साइकोथेरेपी या CBT लें – व्यवहार में बदलाव लाने के लिए यह सबसे कारगर उपाय है।
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शॉपिंग ऐप्स हटाएं – फोन से ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स डिलीट करें। शुरुआत में बेचैनी होगी लेकिन बाद में फर्क महसूस होगा।
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डिजिटल टाइम लिमिट तय करें – मोबाइल और कंप्यूटर का सीमित उपयोग करें और ध्यान किसी रचनात्मक कार्य में लगाएं।
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अकेले न रहें – परिवार या दोस्तों के साथ वक्त बिताएं।
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शॉपिंग सोच-समझकर करें – जरूरी सामान ही खरीदें, और परिवार की सलाह लें।
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कैश पेमेंट अपनाएं – शॉपिंग करते वक्त कैश में भुगतान करें, ताकि खर्च का सही अंदाजा रहे।
Online Shopping अगर आपके जीवन को कंट्रोल करने लगे, तो सतर्क हो जाइए। यह सिर्फ समय और पैसे की बर्बादी नहीं बल्कि एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या भी बन सकती है। समय रहते पहचान और सही सलाह से इससे बाहर निकला जा सकता है।