एसएमएस अस्पताल अग्निकांड: अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई, मृतकों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा

एसएमएस अस्पताल अग्निकांड: अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई, मृतकों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा

एसएमएस अस्पताल अग्निकांड में छह मौतों के बाद जयपुर सरकार ने सख्त कार्रवाई की। अधिकारियों को निलंबित कर मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित।

एसएमएस अस्पताल अग्निकांड: एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में लगी आग से छह लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके तहत अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी और ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. अनुराग धाकड़ को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही अधिशाषी अभियंता मुकेश सिंघल को निलंबित कर दिया गया है।

सीएम भजनलाल शर्मा ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है। सरकार ने अभी तक छह मौतों की ही पुष्टि की है और मुआवजा भी केवल उन्हीं के परिवारों को दिया जाएगा। मुआवजे की मांग को लेकर मृतकों के परिजन अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे थे।

फायर सेफ्टी एजेंसी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है। जबकि कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, लेकिन बड़े अधिकारियों की जवाबदेही अभी तय नहीं हुई है। इस बीच अस्पताल अधीक्षक का कार्यभार डॉ. मृणाल जोशी को और ट्रॉमा सेंटर के अधीक्षक का कार्यभार डॉ. बीएल यादव को सौंपा गया है।

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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने घटना स्थल का दौरा कर जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने घटना की उच्च स्तरीय जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा आयुक्त की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति गठित की है, जो जल्द ही रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री गजेन्द्र सिंह ने कहा कि अस्पताल की क्षतिग्रस्त आईसीयू जल्द से जल्द दुरुस्त की जाएगी और तब तक मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि जून माह में सीआईएसएफ को अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे शीघ्र लागू किया जाएगा।

एसएमएस अस्पताल अग्निकांड के बाद सरकार ने प्रदेश भर के अस्पतालों में फायर सेफ्टी और सुरक्षा प्रबंधों को सुदृढ़ करने के लिए कदम उठाए हैं ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

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