मिडल एज तक नहीं छोड़ी स्मोकिंग, तो बुढ़ापे में घटेगी सोचने-समझने की ताकत – लैंसेट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

मिडल एज तक नहीं छोड़ी स्मोकिंग, तो बुढ़ापे में घटेगी सोचने-समझने की ताकत – लैंसेट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

स्मोकिंग की लत मिडल एज तक नहीं छोड़ी तो बुढ़ापे में कॉग्निटिव डिक्लाइन का खतरा बढ़ता है। जानें लैंसेट स्टडी के अनुसार इसका असर और समाधान।

बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होना सामान्य माना जाता है, लेकिन हाल ही में लैंसेट (Lancet) की एक स्टडी ने चेतावनी दी है कि अगर मिडल एज तक स्मोकिंग नहीं छोड़ी गई, तो बुढ़ापे में गंभीर कॉग्निटिव डिक्लाइन (Cognitive Decline) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

स्टडी के अनुसार, जो लोग अपनी मिडल लाइफ (45-55 की उम्र) में स्मोकिंग छोड़ देते हैं, उनमें बुढ़ापे में मानसिक क्षमता कम होने का खतरा 20% तक कम हो जाता है। वहीं वर्बल फ्लुएंसी में गिरावट का जोखिम 50% तक घट जाता है।

स्मोकिंग से कैसे होता है दिमाग को नुकसान?

  • स्मोकिंग से ब्रेन सेल्स तक ब्लड सप्लाई कम हो जाती है जिससे न्यूरॉन्स धीरे-धीरे डैमेज होने लगते हैं।

  • यह अल्जाइमर, डिमेंशिया और स्ट्रोक जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की आशंका को बढ़ाता है।

  • निकोटिन और टॉक्सिन्स के कारण दिमाग की नसें सिकुड़ने लगती हैं, जिससे सोचने-समझने की ताकत कमजोर होती जाती है।

  • स्मोकिंग से ब्रेन में एमिलॉयड प्लाक्स बनने लगते हैं, जो न्यूरोडिजनरेटिव डिसीज का कारण बन सकते हैं।

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स्मोकिंग छोड़ने के फायदे

  1. मेंटल हेल्थ में सुधार: मिडल एज में स्मोकिंग छोड़ने से ब्रेन हेल्थ लंबे समय तक बनी रहती है।

  2. बुढ़ापे में बेहतर कम्युनिकेशन: वर्बल फ्लुएंसी और मेमोरी लॉस की स्पीड कम हो जाती है।

  3. डिमेंशिया और अल्जाइमर से बचाव: ब्रेन फंक्शन धीमा नहीं होता और व्यक्ति स्वतंत्र जीवन जी पाता है।

  4. स्ट्रोक का खतरा घटता है: ब्लड वेसल्स की हेल्थ सुधरती है, जिससे दिमाग तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचता है।

क्या करें?

  • 40 की उम्र के पहले ही स्मोकिंग छोड़ने की कोशिश करें।

  • हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और मेंटल एक्टिविटी से ब्रेन को एक्टिव रखें।

  • स्मोकिंग की आदत से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर की सलाह लें या निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी का सहारा लें।

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