शीतला अष्टमी 2026: शीतला अष्टमी कब है और पूजा का महत्व, बच्चों को रोगों से बचाने का तरीका

शीतला अष्टमी 2026: शीतला अष्टमी कब है और पूजा का महत्व, बच्चों को रोगों से बचाने का तरीका

शीतला अष्टमी 2026: जानें शीतला अष्टमी की पूजा कब और कैसे करें। इस दिन माता शीतला को ठंडा भोग अर्पित कर संतान और परिवार को रोगों से बचाएं।

शीतला अष्टमी 2026: इस साल शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन माता शीतला को विशेष रूप से ठंडा भोग अर्पित किया जाता है। शीतला अष्टमी के दिन पूजा करने से संतान और परिवार की बीमारियों से रक्षा होती है।

शीतला सप्तमी और अष्टमी: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी का महत्व है। 2026 में शीतला सप्तमी 10 मार्च को और शीतला अष्टमी 11 मार्च को है। इसे स्थानीय तौर पर बासोड़ा भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन माता शीतला को ठंडा भोग अर्पित किया जाता है।

शीतला माता की पूजा का महत्व

हिंदू धर्म में शीतला माता को रोग-निवारण की देवी माना जाता है। वे मुख्य रूप से चेचक, खसरा, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों से रक्षा करती हैं। शीतला अष्टमी के दिन पूजा करने से संतान की स्वास्थ्य सुरक्षा, परिवार में शांति और रोगमुक्ति की प्राप्ति होती है। माता की कृपा से संतान की खुशहाली और सौभाग्य भी बढ़ता है।

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शीतला अष्टमी 2026 की तिथि और मुहूर्त

  • तिथि: 11 मार्च 2026, सुबह 1:54 बजे से 12 मार्च 2026, सुबह 4:19 बजे तक

  • पूजा मुहूर्त: सुबह 6:36 बजे से शाम 6:27 बजे तक

शीतला अष्टमी पूजा विधि

  1. प्रातः समय स्नान करके व्रत का संकल्प लें।

  2. चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर शीतला माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  3. मंत्र “श्रीं शीतलायै नमः, इहागच्छ इह तिष्ठ” का जाप करते हुए जल अर्पित करें।

  4. चंदन और अक्षत से तिलक करें, फूल और माला अर्पित करें।

  5. माता को धूप और दीप दिखाएं।

  6. भोग में रबड़ी, मीठे चावल, पुए, बिना नमक की पूड़ी आदि एक दिन पुराने बासी भोजन का अर्पण करें।

  7. अंत में शीतला अष्टमी व्रत की कथा सुनें।

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