राजस्थान सरकार ने खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई, बिश्नोई आंदोलन के बाद प्रस्तावित ‘ट्री प्रोटेक्शन कानून’ जल्द लागू होगा। खेजड़ी संरक्षण के लिए सख्त कदम।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में खेजड़ी पेड़ों की सुरक्षा को लेकर बिश्नोई आंदोलन के बाद राजस्थान सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने राज्यभर में खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश जारी किया है। राजस्व विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टर और आयुक्तों को निर्देश दिए हैं कि खेजड़ी के पेड़ को कोई भी व्यक्ति या संस्था तब तक काट नहीं पाएगी, जब तक प्रस्तावित ‘ट्री प्रोटेक्शन कानून’ लागू नहीं हो जाता।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और बिश्नोई समुदाय की भूमिका
खेजड़ी वृक्ष राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण और जैव विविधता में योगदान देता है। पश्चिमी राजस्थान में खेजड़ी कटाई के कारण स्थानीय लोगों और पर्यावरणवादियों में गहरा विरोध हुआ, जिससे खेजड़ी बचाओ आंदोलन (Khejri Bachao Andolan) तेज हो गया।
मुख्य रूप से बिश्नोई समुदाय के नेतृत्व में बीकानेर में यह आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग, संत और युवा सभी ने अपनी आवाज़ उठाई। कई पर्यावरण संगठनों ने भी आंदोलन का समर्थन किया, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ा।
also read: राजस्थान बजट 2026-27: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं…
सरकार का आदेश और आंदोलन का परिणाम
राजस्थान सरकार ने लंबे संवाद और आयोजनों के बाद खेजड़ी कटाई पर रोक का आदेश जारी किया। यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक विशेष ‘ट्री प्रोटेक्शन कानून’ विधानसभा में पारित नहीं हो जाता। इस घोषणा के बाद आंदोलनकारियों ने अपना महापड़ाव स्थगित किया, लेकिन चेतावनी दी कि कानून ढीला या जनता की भावना के अनुरूप नहीं होने पर आंदोलन फिर शुरू किया जा सकता है।
खेजड़ी का पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व
खेजड़ी को राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और यह थार रेगिस्तान जैसे कठिन पर्यावरणीय हालात में जीवन बनाए रखने में मदद करता है। यह मिट्टी को बांधता है, पशुपालन और स्थानीय पारिस्थितिकी को सशक्त बनाता है। बिश्नोई समुदाय की ऐतिहासिक कथाओं में भी खेजड़ी का विशेष स्थान है। 1730 के खेजड़ली आंदोलन में अमृता देवी और अन्य 363 लोगों ने पेड़ों की रक्षा के लिए बलिदान दिया था।
आगे क्या होगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया खेजड़ी संरक्षण कानून जल्द ही विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। इसमें खेजड़ी कटाई पर सख्त दंड और संरक्षण के स्पष्ट प्रावधान होंगे। स्थानीय समुदायों और पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ मिलकर पक्षियों, वन्यजीवों और मिट्टी की सुरक्षा के लिए मजबूत संरक्षण फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है।