राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: 312 सरकारी स्कूल बंद, बच्चों को पड़ोसी स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया, कम छात्र संख्या और बेहतर शिक्षा के लिए उठाया गया यह कदम।
राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने कुल 312 सरकारी स्कूलों को बंद करने और इन्हें पड़ोसी स्कूलों में मर्ज करने का निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के अनुसार, इन स्कूलों में बच्चों की संख्या 25 या उससे कम है, जिससे बच्चों की पढ़ाई में प्रभाव पड़ सकता था।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इन बंद किए जाने वाले स्कूलों में प्राइमरी (कक्षा 1 से 8) और सेकेंडरी (कक्षा 9 से 12) दोनों प्रकार के स्कूल शामिल हैं। बच्चों को सुरक्षित और व्यवस्थित शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें पड़ोसी स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।
टीचर्स और स्टाफ की नई तैनाती
इन स्कूलों के बंद होने के बाद वहां के शिक्षक और स्टाफ को भी अन्य स्कूलों में तैनात किया जाएगा। कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी बच्चा पढ़ाई नहीं कर रहा। इन स्कूलों की बिल्डिंगों को जिला कलेक्टरों के माध्यम से सरकारी उपयोग के लिए दिया जाएगा।
स्कूलों में कम छात्र संख्या की वजह
मदन दिलावर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के प्रयास असफल रहे हैं। इसके विपरीत, प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए, राज्य सरकार ने बच्चों की बेहतर शिक्षा और संसाधनों के उचित उपयोग के लिए ये निर्णय लिया है।
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कांग्रेस सरकार पर आरोप
शिक्षा मंत्री ने पूर्व कांग्रेस सरकारों को दोषी ठहराते हुए कहा कि कई स्कूल बिना मानक पूरा किए खोले गए थे, यहां तक कि कम आबादी वाले क्षेत्रों में भी। अब इन स्कूलों को बंद कर उनका मर्जर करना आवश्यक हो गया है।
मर्जर प्रक्रिया और आगामी सेशन
सरकार ने बताया कि सेशन समाप्त होते ही इन 312 स्कूलों का मर्जर पूरा कर दिया जाएगा। राजस्थान में नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। इसके अलावा, जयपुर के शहरी क्षेत्रों में भी पहले से ही कुछ स्कूलों का मर्जर किया जा चुका है।
नीरजा मोदी स्कूल की छात्रा की मौत पर अपडेट
राज्य शिक्षा मंत्री ने जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में 10 वर्षीय छात्रा अमायरा की मौत की घटना पर कहा कि जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
राजस्थान में सरकारी स्कूलों के मर्जर और बंद होने के इस फैसले से शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव की उम्मीद है।