पुतिन ने भारत दौरे से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बुलेटप्रूफ गाड़ी में कारपूल का खुलासा किया। जानें SCO सम्मेलन और दोनों नेताओं की अनौपचारिक बातचीत के पीछे की पूरी कहानी।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत दौरे से कुछ घंटे पहले एक निजी टीवी इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बुलेटप्रूफ गाड़ी में कारपूल करने का अनुभव साझा किया। पुतिन ने कहा कि यह आइडिया उनका था और इस कदम ने दोनों नेताओं के बीच विश्वास और सहजता को दर्शाया।
पुतिन का SCO सम्मेलन में अनुभव
SCO शिखर सम्मेलन के दौरान तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन एक ही कार में बैठे थे। इस पल को इतिहास का हिस्सा बताया जा सकता है। पुतिन ने इंटरव्यू में बताया कि इस दौरान कोई कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी और यह पूरी तरह अनौपचारिक था। कार में बातचीत तुरंत शुरू हुई और मंजिल तक पहुँचने के बाद भी यह लगभग 45 मिनट तक जारी रही।
मोदी-पुतिन की दोस्ती और लंबी बातचीत
सम्मेलन से लौटते समय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर पुतिन के साथ साझा फोटो पोस्ट करते हुए लिखा कि उनकी बातचीत हमेशा सीख देने वाली रहती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुतिन खुद पीएम मोदी को लेने के लिए करीब दस मिनट तक प्रतीक्षा करते रहे। होटल पहुँचने के बाद भी दोनों नेताओं की अनौपचारिक बातचीत आधे घंटे से अधिक चली।
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वैश्विक राजनीति और दोस्ती का संदेश
हाल के दिनों में अमेरिका द्वारा भारत पर रूसी कच्चे तेल खरीद पर टैक्स और चेतावनियां लगाई गई थीं, जिससे भारत-रूस आर्थिक संबंधों में तनाव दिख रहा था। इसके बावजूद पुतिन और पीएम मोदी के बीच सौहार्दपूर्ण और व्यक्तिगत संबंध ने यह संदेश दिया कि भारत अपने कूटनीतिक फैसलों में स्वतंत्र है।
पुतिन की ऐतिहासिक भारत यात्रा
यह पुतिन का 2021 के बाद पहला भारत दौरा है। यह यात्रा भारत-रूस साझेदारी के 25 साल पूरे होने और 23वें द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के अवसर पर हो रही है। दौरे के दौरान दिल्ली ने पुतिन को विशेष सम्मान दिया और पीएम मोदी ने एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद पीएम आवास पर विशेष रात्रिभोज आयोजित किया गया।
दौरे का कार्यक्रम और उम्मीदें
आज दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के बीच सैन्य सहयोग, तकनीक, ऊर्जा और व्यापार को लेकर नई नीतियों पर चर्चा होने की संभावना है। दिन के अंत में दोनों नेता संयुक्त बयान भी जारी करेंगे।
इस दौरे ने भारत-रूस के मजबूत कूटनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को फिर से साबित किया और वैश्विक राजनीति में एक सकारात्मक संदेश भेजा।