प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्टअप इंडिया अभियान के 10 साल पूरे होने के अवसर पर एंटरप्रेन्योर और स्टेकहोल्डर्स को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में पिछले एक दशक में हुए बड़े बदलावों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
जोखिम लेने की आवश्यकता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जोखिम लेने की आदत उन्हें बचपन से ही है और उन्होंने हमेशा रिस्क-टेकिंग को महत्व दिया। उन्होंने यह भी बताया कि कई ऐसे काम हैं जो दशकों से पहले की सरकारें नहीं कर पाईं, क्योंकि उनमें चुनाव हारने या कुर्सी जाने का डर था। मोदी ने स्पष्ट किया कि ऐसे महत्वपूर्ण कार्य किसी को तो करना ही होगा, और जो नुकसान होगा वह उनका होगा, और फायदा देशवासियों को मिलेगा।
उन्होंने युवाओं से कहा, “जो काम देश के लिए जरूरी है, उसे किसी को तो करना ही होगा। किसी को तो Risk लेना ही होगा।”
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स्टार्टअप इंडिया: 10 साल की प्रगति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्टअप इंडिया अभियान की शुरुआत 16 जनवरी, 2016 को की थी। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और निवेश आधारित विकास को सक्षम बनाना था। इसके तहत भारत को नौकरी चाहने वाला देश नहीं, नौकरी देने वाला देश बनाने की योजना थी।
उन्होंने बताया कि एक दशक पहले भारत में स्टार्टअप्स की संख्या लगभग 500 थी, जबकि आज यह संख्या 2,00,000 से अधिक हो चुकी है। उन्होंने इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन बताते हुए कहा कि स्टार्टअप इंडिया ने देश में आत्मविश्वास, नए विचार और जोखिम लेने की मानसिकता को बदलने में मदद की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि स्टार्टअप इंडिया केवल आर्थिक पहल नहीं है, बल्कि समाज में उद्यमिता और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने वाला अभियान भी है।