भारत और मंगोलिया के रिश्ते हुए और मजबूत: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति उखना की महत्वपूर्ण मुलाकात, 70 वर्षों की कूटनीतिक साझेदारी में नए फैसले

भारत और मंगोलिया के रिश्ते हुए और मजबूत: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति उखना की महत्वपूर्ण मुलाकात, 70 वर्षों की कूटनीतिक साझेदारी में नए फैसले

भारत और मंगोलिया के बीच बढ़ती दोस्ती: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति उखना की अहम मुलाकात, 70 वर्षों की कूटनीतिक साझेदारी पर नए फैसले, ऊर्जा, संस्कृति और विकास में सहयोग को मजबूत किया गया।

भारत और मंगोलिया के बीच रिश्ते अब और भी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मंगोलिया के राष्ट्रपति हुरेलसुख उखना की चार दिवसीय भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंगलवार को हुई बातचीत ने दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इस महत्वपूर्ण बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जो दोनों देशों के विकास और सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना के साथ दिल्ली में विस्तृत चर्चा की। इस वर्ष दोनों देश कूटनीतिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ और रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्षों का जश्न मना रहे हैं। मोदी ने कहा, “हमारी साझेदारी की गहराई और विस्तार हमारे लोगों के बीच मजबूत संबंधों में दिखाई देता है।” यह राष्ट्रपति उखना की भारत में पहली यात्रा है, जो दोनों देशों के लिए विशेष महत्व रखती है।

मोदी ने मंगोलिया की विकास यात्रा में भारत को एक मजबूत और विश्वसनीय साझेदार बताया। भारत की 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की ऋण सहायता से मंगोलिया में चल रही तेल रिफाइनरी परियोजना इस साझेदारी का बेहतरीन उदाहरण है, जो मंगोलिया की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी। इस परियोजना में 2,500 से अधिक भारतीय और मंगोलियाई पेशेवर मिलकर काम कर रहे हैं, यह भारत की सबसे बड़ी वैश्विक विकास परियोजनाओं में से एक है।

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भारत और मंगोलिया के बीच साझा बौद्ध धर्म की आध्यात्मिक विरासत भी गहरे संबंधों की मिसाल है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सदियों से दोनों देश बौद्ध धर्म के सिद्धांतों से जुड़े हैं, इसलिए हम आध्यात्मिक रूप से भी सहोदर हैं।” अगले वर्ष भगवान बुद्ध के महान शिष्यों सारिपुत्र और मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेष मंगोलिया भेजे जाएंगे। साथ ही, गंदन बौद्ध मठ में संस्कृत शिक्षकों की तैनाती भी होगी, जिससे वहां के बौद्ध ग्रंथों का गहन अध्ययन संभव होगा।

दोनों देशों ने 10 लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए परियोजना शुरू की है। नालंदा विश्वविद्यालय और मंगोलिया के गंदन मठ के बीच इस सहयोग से सांस्कृतिक विरासत को नई जान मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह सांस्कृतिक बंधन भारत-मंगोलिया की मित्रता की नींव है।”

बैठक में ऊर्जा, कौशल विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। मोदी ने कहा, “हमारा निजी क्षेत्र ऊर्जा, खनन, डिजिटल, कृषि और सहकारिता के क्षेत्रों में नई संभावनाओं की खोज कर रहा है।” मंगोलिया के राष्ट्रपति ने भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहल और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की प्रशंसा की।

भारत ने मंगोलिया के नागरिकों के लिए मुफ्त ई-वीजा की घोषणा की है, जिससे दोनों देशों के बीच यात्रा और संपर्क और आसान होगा। इसके अलावा, लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद और मंगोलिया के आर-खांगाय प्रांत के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं, जो सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाएगा।

70 वर्षों की कूटनीतिक साझेदारी के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति उखना ने एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया, जिसमें भारत का पारंपरिक रामलीला नाटक और मंगोलिया का बियेल्गी नृत्य दर्शाया गया है। यह डाक टिकट दोनों देशों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है।

इस मुलाकात और समझौतों के साथ भारत-मंगोलिया संबंध नई ऊंचाइयों को छूने की ओर बढ़ रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चलेगा।

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