अगर आपके कंधों में लगातार Pain बना रहता है तो ये टेस्ट जरूर कराएं।

अगर आपके कंधों में लगातार Pain बना रहता है तो ये टेस्ट जरूर कराएं।

कंधों का Pain कभी-कभी हल्का हो सकता है, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। इसलिए इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच कराना और डॉक्टर की सलाह से उपचार शुरू करना आपके लिए लाभदायक होगा। अगर आपको कंधों में दर्द महसूस हो रहा है तो कुछ जरूरी टेस्ट करवा लेना चाहिए।

अगर आपको लगातार कंधे में Pain रहता है और वह ठीक नहीं हो रहा है, तो इसे हल्के में लेना खतरा हो सकता है। कई लोग इसे सामान्य दर्द मानकर घरेलू उपाय अपनाते रहते हैं, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।लगातार कंधे में दर्द होने पर कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट कराना जरूरी होता है और इसके पीछे कौन-कौन से कारण हो सकते हैं।

कंधे में दर्द के कई कारण हो सकते हैं। यह आमतौर पर मांसपेशियों के तनाव, गलत मुद्रा, भारी वस्तुएं उठाने या चोट लगने से होता है। हालांकि, कभी-कभी यह फ्रोजन शोल्डर, रोटेटर कफ इंजरी, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस या दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं का भी संकेत हो सकता है।

यदि कंधों में लंबे समय से लगातार दर्द हो रहा हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा दर्द किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। यदि यह समस्या बनी रहे तो सतर्क रहना बेहद जरूरी है।  कंधे में दर्द के क्या कारण और लक्षण हो सकते हैं।

यदि दर्द लगातार बना रहता है, हाथ उठाने में कठिनाई होती है, दर्द गर्दन या पीठ तक फैल जाता है, सोते समय दर्द बढ़ जाता है, हाथों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है, और ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से मिलकर उचित जांच कराना आवश्यक है। ऐसे मामलों में निम्नलिखित टेस्ट कराना फायदेमंद होता है:

  • एक्स-रे (X-ray): कंधे की हड्डियों में फ्रैक्चर या डिस्लोकेशन है या नहीं, यह जांचने के लिए पहला और महत्वपूर्ण टेस्ट है। इससे जोड़ की स्थिति का भी पता चलता है।
  • एमआरआई (MRI): मांसपेशियों या लिगामेंट्स में चोट या खिंचाव की सही जानकारी के लिए एमआरआई जरूरी है, खासकर रोटेटर कफ की चोट की पुष्टि के लिए।
  • अल्ट्रासाउंड: यह मांसपेशियों, लिगामेंट्स और टेंडन की स्थिति देखने में मदद करता है और यह सस्ता व जल्दी होने वाला विकल्प है।
  • ब्लड टेस्ट: कभी-कभी कंधे के दर्द का कारण इंफेक्शन या गठिया भी हो सकता है। इसके लिए सीआरपी, ईएसआर और रूमेटॉयड फैक्टर जैसे ब्लड टेस्ट कराए जा सकते हैं।
  • नर्व कंडक्शन टेस्ट (NCV/EMG): यदि दर्द के साथ हाथों में झुनझुनी या कमजोरी भी हो तो यह टेस्ट नसों की स्थिति जानने के लिए कराया जाता है, जिससे पता चलता है कि कहीं नसों पर दबाव तो नहीं है।

यदि कंधे में दर्द 7-10 दिनों से अधिक समय तक बना रहे तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। देर करने पर समस्या और बढ़ सकती है। लगातार दर्द से रोजमर्रा के कामों में परेशानी, नींद में दिक्कत और मानसिक तनाव भी हो सकता है। इसलिए समय पर जांच और सही इलाज बेहद आवश्यक है।

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