दिल्ली सरकार रेबीज को ‘नोटिफाएबल’ डिजीज घोषित करेगी, हर केस की अनिवार्य रिपोर्टिंग, वैक्सीन और इलाज की सुविधा सुनिश्चित, जानें स्टेट एक्शन प्लान और रेबीज रोकथाम के उपाय।
राजधानी दिल्ली में पब्लिक हेल्थ सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि रेबीज से होने वाली कोई भी मौत स्वीकार्य नहीं है। यह घातक बीमारी पूरी तरह से रोकी जा सकती है, बशर्ते समय पर सही इलाज मिले।
रेबीज को कानूनी मान्यता मिलेगी
दिल्ली सरकार इंसानों में रेबीज को महामारी रोग अधिनियम के तहत ‘नोटिफाएबल डिजीज’ के रूप में घोषित करने की तैयारी कर रही है। इस कदम का उद्देश्य राजधानी में हर रेबीज के केस को सिस्टम में रिकॉर्ड करना और समय पर पब्लिक हेल्थ एक्शन सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती पहचान और रिपोर्टिंग से जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
हर केस की अनिवार्य रिपोर्टिंग
इस नोटिफिकेशन के लागू होने के बाद सरकारी अस्पतालों, निजी क्लीनिक और मेडिकल कॉलेजों को रेबीज के संदिग्ध और पुष्ट मामलों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देने की जिम्मेदारी होगी। व्यक्तिगत प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को भी रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
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शून्य मौत का लक्ष्य
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा, “रेबीज पूरी तरह रोकी जा सकती है यदि मरीज को समय पर वैक्सीन और इलाज मिले। नोटिफाएबल डिजीज बनने से निगरानी मजबूत होगी और मरीज तक समय पर मदद पहुंच सकेगी।” अधिसूचना जारी होते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
इलाज और वैक्सीन की सुविधा
दिल्ली के 11 जिलों में 59 स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही एंटी-रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन (सीरम) 33 चिन्हित अस्पतालों में मौजूद है। सरकार इसे रेबीज रोकथाम की मजबूत नींव मान रही है।
कुत्तों से इंसानों तक संक्रमण रोकने की रणनीति
दिल्ली सरकार स्टेट एक्शन प्लान के तहत कुत्तों से फैलने वाले रेबीज मामलों को रोकने और इंसानों में मौत का आंकड़ा शून्य करने के लिए काम कर रही है। इसमें कुत्तों और अन्य जानवरों के वैक्सीनेशन नेटवर्क को मजबूत करना भी शामिल है।