दिल्ली-एनसीआर में इस साल हवा की गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी के आनंद विहार सहित कई इलाकों में एक्यूआई (AQI) 300 से ऊपर पहुंच गया है, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CQUM) ने 2024 की तुलना में एक दिन पहले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण की पाबंदियां लागू कर दी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पड़ोसी राज्यों से आने वाले प्रदूषण के कारण दिल्ली की हवा लगातार खराब हो रही है। दीपावली के बाद प्रदूषण और बढ़ने के आसार हैं, जिसके चलते जल्द ही GRAP के दूसरे चरण की कड़ाई भी लागू हो सकती है।
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत पाबंदियां
दिल्ली-एनसीआर में पहली चरण की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं, जिनमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए हैं। हालांकि, पुराने वाहनों पर फिलहाल रोक नहीं लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट में 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को हटाने का मामला लंबित है, इसलिए CQUM ने अपने आदेश से इस प्रतिबंध को हटा लिया है। इसका मतलब है कि पुराने वाहन अभी भी शहर में चल सकते हैं।
पटाखों पर भी प्रतिबंध की भाषा में बदलाव हुआ है। पटाखों को लेकर कोर्ट और ट्रिब्यूनल के आदेश का पालन करने को कहा गया है, लेकिन ‘प्रतिबंध’ शब्द को हटाकर आदेश को नरम बनाया गया है।
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ग्रीन पटाखों से प्रदूषण में 35% तक कमी
वैज्ञानिक और अनुसंधान संस्थान CSIR और NEERI के मुताबिक, ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30-35% कम प्रदूषण फैलाते हैं। इन पटाखों में खास कैमिकल फार्मूला होता है जो जलने पर पानी की बूंदें निकालता है, जिससे हवा में प्रदूषण कम होता है।
दिल्ली सरकार ने उठाए कड़े कदम
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए “प्रदूषण पर जोरदार प्रहार” नामक 25-सूत्री एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान-2025 लॉन्च किया है, जिसमें प्रमुख स्रोतों पर फोकस किया गया है।
कुछ प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:
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पुराने वाहनों के लिए ईंधन आपूर्ति बंद करना और 2025 से BS, CNG, और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही शहर में प्रवेश की अनुमति देना।
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कचरा प्रबंधन के लिए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स की क्षमता बढ़ाना, ओखला में 2950 टीपीडी और नरेला-बावाना में 3000 टीपीडी प्लांट स्थापित करना।
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हरितीकरण के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 70 लाख पौधे लगाने और IIT कानपुर के साथ क्लाउड सीडिंग पायलट प्रोजेक्ट शुरू करना।
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निर्माण धूल नियंत्रण हेतु बड़े निर्माण स्थलों के लिए पंजीकरण अनिवार्य करना और हाई-राइज निर्माण में एंटी-स्मॉग गन लगाने का प्रावधान।
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AI-सक्षम DPCC पोर्टल से ऑटोमेटिक चालान प्रणाली और नई एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित करना।
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‘एनवायरनमेंट दूत’ कार्यक्रम और आरडब्लूए के सहयोग से बायोमास जलाने पर रोक के लिए इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराना।
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सड़क धूल नियंत्रण के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपर, इलेक्ट्रिक लिटर पिकर, और रात में जलाने वाले टैंकर तैनात करना।
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उद्योगों में प्रदूषण रोकने के लिए PNG गैस का अनिवार्यकरण और बायो-गैस एवं बायो-CNG प्लांट विकसित करना।
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प्रदूषण हॉटस्पॉट्स पर मिस्ट स्प्रेयर लगाना और रीयल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी कराना।