उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं को दिया एकता का मंत्र, ‘मेरा-तुम्हारा नहीं, कहें हमारा कश्मीर’

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं को दिया एकता का मंत्र, 'मेरा-तुम्हारा नहीं, कहें हमारा कश्मीर'

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कश्मीर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में छात्रों को ‘हमारा कश्मीर’ का मंत्र दिया। जानें उन्होंने युवाओं को नशे और सोशल मीडिया पर क्या सलाह दी।

भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (VP CP Radhakrishnan) ने कश्मीर विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह (Convocation) में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्रवाद और एकता का एक बड़ा संदेश दिया। उपराष्ट्रपति ने युवाओं से अपील की कि वे कश्मीर को ‘मेरा’ या ‘तुम्हारा’ कहने के बजाय ‘हमारा कश्मीर’ कहें, क्योंकि कश्मीर एकजुट भारत के हृदय में बसता है।

अपने संबोधन में उन्होंने न केवल सामाजिक समरसता पर जोर दिया, बल्कि युवाओं को नशे और सोशल मीडिया के दुरुपयोग जैसी आधुनिक चुनौतियों से बचने की सलाह भी दी।

विविधता में एकता और कश्मीरी छात्रों का संस्मरण

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने देश की विविधता को भारत की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने अपने झारखंड के राज्यपाल कार्यकाल के दौरान का एक भावुक किस्सा साझा किया। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत कश्मीरी छात्र झारखंड पहुंचे थे।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बताया, “मैं स्वयं शाकाहारी हूँ, लेकिन जब कश्मीरी छात्र राजभवन आए, तो मैंने सुनिश्चित किया कि उन्हें उनकी पसंद का मांसाहारी भोजन परोसा जाए। एक लोकतंत्र में हमें दूसरों की भावनाओं और खान-पान का सम्मान करना चाहिए। हम अपनी मान्यताओं पर गर्व कर सकते हैं, लेकिन दूसरों को नीचा दिखाना लोकतंत्र के खिलाफ है।”

शिक्षा और सरकारी योजनाओं का महत्व

मजबूत भारत के निर्माण के लिए शिक्षा को आधार स्तंभ बताते हुए उपराष्ट्रपति ने पीएम स्कॉलरशिप स्कीम (PM Scholarship Scheme) की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा:

  • ऐसी योजनाएं युवाओं के भविष्य को संवारती हैं।
  • विभिन्न राज्यों के संस्थानों में पढ़ने से नेशनल इंटीग्रेशन (राष्ट्रीय एकीकरण) को बढ़ावा मिलता है।
  • शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे युवा नशे (Drugs) के चंगुल से दूर रहकर देश के विकास में योगदान दे सकते हैं।
  • महिला शक्ति का दिखा जलवा: 186 गोल्ड मेडल छात्राओं के नाम

कश्मीर विश्वविद्यालय के इस दीक्षांत समारोह में महिला सशक्तिकरण की एक शानदार तस्वीर देखने को मिली। समारोह में कुल 239 गोल्ड मेडल दिए गए, जिनमें से 186 मेडल महिला स्कॉलर्स ने अपने नाम किए।

इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “आज मैं तीन कारणों से बेहद खुश हूँ। पहला—राज्य की शिक्षा मंत्री महिला हैं, दूसरा—विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर महिला हैं, और तीसरा—मेडल जीतने वालों में भी महिलाओं का वर्चस्व है।”

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दीक्षांत समारोह के मुख्य आंकड़े

समारोह के दौरान भारी संख्या में डिग्रियां प्रदान की गईं, जो कश्मीर में शैक्षणिक प्रगति को दर्शाती हैं:

कुल डिग्रियां: 59,558

अंडरग्रेजुएट: 44,910

पोस्टग्रेजुएट: 13,545

PhD/MPhil: 806

उपराष्ट्रपति ने अंत में कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की असली विरासत उसके छात्र होते हैं। वे समाज में कैसा योगदान देते हैं और उनका चरित्र कैसा है, यही संस्थान की पहचान तय करता है।

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