5 साल से कम उम्र के बच्चों में अगर समय रहते कैल्शियम की कमी को पहचाना न जाए, तो यह उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए जरूरी है कि बच्चों के भोजन में सभी आवश्यक Nutrients से भरपूर चीजें नियमित रूप से शामिल की जाएं।
शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पोषण जरूरी
बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए संतुलित पोषण बेहद अहम है। खासकर हड्डियों, दांतों और नर्वस सिस्टम की मजबूती के लिए कैल्शियम का पर्याप्त मात्रा में सेवन जरूरी होता है। 5 साल से छोटे बच्चों में यदि यह तत्व कम हो जाए, तो हड्डियों के कमजोर होने के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
कैल्शियम की कमी के लक्षण
बच्चों में कैल्शियम की कमी से हड्डियों में कमजोरी, टेढ़ापन, चलने-फिरने में दिक्कत, दांतों का देर से आना या सड़ना, और मसूड़ों की समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा मांसपेशियों में ऐंठन, बार-बार दर्द, हाथ-पैर सुन्न होना जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।
बच्चे सामान्य से अधिक चिड़चिड़े, थके हुए या सुस्त दिखाई दे सकते हैं। खेलते समय जल्दी थक जाना, बालों का झड़ना या रूखापन, त्वचा का सूखना और नाखूनों का कमजोर होना भी संकेत हो सकते हैं। गंभीर मामलों में दौरे पड़ना, सांस लेने में कठिनाई, आंखों का बार-बार झपकना, होंठ हिलना जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
कैल्शियम की कमी के कारण
जन्म के छह महीने तक मां का दूध ही पर्याप्त होता है, लेकिन इसके बाद बच्चों को दूध, दही, पनीर जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ दिए जाने चाहिए। अगर यह पोषण न मिले, तो शरीर में कैल्शियम की कमी हो सकती है।
विटामिन डी की कमी होने पर भी शरीर कैल्शियम को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता। समय से पहले जन्मे या कम वजन वाले बच्चों में भी यह समस्या आम हो सकती है। कुछ मामलों में हार्मोनल या आनुवांशिक वजहों से भी कैल्शियम की कमी देखी जाती है।
कैल्शियम की दैनिक आवश्यकता
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1 से 3 साल के बच्चों के लिए: लगभग 700 मिलीग्राम कैल्शियम रोजाना
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4 से 8 साल के बच्चों के लिए: करीब 1000 मिलीग्राम कैल्शियम रोजाना
कमी कैसे दूर करें?
3 साल के बाद बच्चों को नियमित रूप से गाय का दूध, दही, पनीर जैसे उत्पाद देना चाहिए। दूध न पीने वाले बच्चों को छाछ या दही दिया जा सकता है। साथ ही रोजाना कम से कम 15-20 मिनट धूप में खेलने की आदत डालें ताकि शरीर में प्राकृतिक रूप से विटामिन D बन सके, जो कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है।
जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड स्नैक्स से बच्चों को दूर रखें। यदि किसी भी तरह के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और बिना परामर्श के कोई दवा या सप्लीमेंट न दें।
बच्चों की सेहत के लिए सही समय पर कैल्शियम की कमी को पहचानना और उचित खानपान द्वारा उसकी पूर्ति करना बहुत जरूरी है, जिससे उनका विकास संतुलित और स्वस्थ तरीके से हो सके।