मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में अपग्रेडेड फॉरेंसिक साइंस लैब का उद्घाटन किया, जिसमें अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। फॉरेंसिक जांच के माध्यम से अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण विकास में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि अब वह दौर खत्म हो गया जब अपराधी बिना किसी डर के अपराध करते थे और पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहते थे। गोरखपुर में अपग्रेडेड फॉरेंसिक साइंस लैब (आरएफएसएल) के उद्घाटन के दौरान, सीएम योगी ने कहा कि राज्य में त्वरित और सटीक जांच के जरिए लोगों को समय पर न्याय मिलेगा और कोई भी अपराधी बच नहीं सकेगा।
उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस लैब्स का विस्तार
गोरखपुर में हाल ही में उद्घाटित फॉरेंसिक साइंस लैब अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है, जो सटीक और विश्वसनीय फॉरेंसिक विश्लेषण करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लैब आधुनिक पुलिसिंग के लिए एक गेम चेंजर साबित होगी, जिससे अपराधों की त्वरित और सही जांच संभव होगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपराधों के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करने के लिए इन लैब्स का विस्तार किया है।
फॉरेंसिक साइंस लैब्स का विस्तार हर कमिश्नरी में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल चार फॉरेंसिक साइंस लैब थीं, लेकिन अब राज्य सरकार ने हर कमिश्नरी में एक फॉरेंसिक साइंस लैब की स्थापना सुनिश्चित की है। इस समय तक, राज्य में फॉरेंसिक साइंस लैब्स की संख्या बढ़कर 12 हो गई है, और छह और लैब्स निर्माणाधीन हैं। इन लैब्स में सभी प्रकार की फॉरेंसिक जांच की जाएगी, जिससे अपराधियों को कड़ी सजा मिल सकेगी।
हर जिले में मोबाइल फॉरेंसिक वैन की सुविधा
फॉरेंसिक साइंस लैब्स की स्थापना के साथ-साथ, राज्य सरकार ने हर जिले में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन के लिए दो-दो मोबाइल वैन भी उपलब्ध कराई हैं। इन मोबाइल वैन के माध्यम से कुछ ही घंटों में फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए जा सकते हैं, जिनकी जांच के बाद पीड़ितों को न्याय जल्दी और सुगमता से मिलेगा। यह प्रणाली दूर-दराज के इलाकों में भी त्वरित जांच सुनिश्चित करेगी।
नए कानूनों के तहत फॉरेंसिक जांच अनिवार्य
सीएम योगी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जुलाई 2023 से तीन नए कानूनों (भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य संहिता 2023) को लागू किया गया है। इन कानूनों के तहत सात साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य कर दिया गया है, जो फॉरेंसिक साइंस लैब्स की उपयोगिता को और भी बढ़ाता है।
फॉरेंसिक साइंस लैब्स से रोजगार का सृजन
सीएम योगी ने यह भी बताया कि फॉरेंसिक साइंस लैब्स से प्रदेश के युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। इस दिशा में, यूपी सरकार ने लखनऊ में यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना की है, जहां लैब टेक्नीशियनों के लिए सर्टिफिकेट कोर्स, साक्ष्य मिलान करने वाले कर्मचारियों के लिए डिप्लोमा और विशेषज्ञों के लिए डिग्री कोर्स की शुरुआत की गई है।
अत्याधुनिक फॉरेंसिक सुविधाएं और भविष्य की योजनाएं
सीएम योगी ने बताया कि गोरखपुर के अपग्रेडेड फॉरेंसिक साइंस लैब में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें एडवांस डीएनए डायग्नोस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और रोबोटिक लैब्स शामिल हैं। ये लैब्स नैनो से लेकर 40 किलो तक के वजन वाले ड्रोन संचालित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार का लक्ष्य साइबर फॉरेंसिक को वैश्विक मानक तक ले जाने का है।
उत्तर प्रदेश में अपराध के खिलाफ मजबूत कदम
सीएम योगी ने यह भी कहा कि अब उत्तर प्रदेश में कोई भी अपराधी बच नहीं सकता। अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत, राज्य सरकार जल्द से जल्द और प्रभावी ढंग से कार्रवाई करेगी। फॉरेंसिक साइंस लैब्स का उद्देश्य नए अपराधों को रोकने और वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर अपराधियों को सजा दिलाना है, जिससे राज्य में एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित हो सके।