मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन, खजांची फ्लाईओवर और जंगल-कौड़िया रिंग रोड का निरीक्षण कर अधिकारियों को गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए तय समय सीमा में निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए इसे समय पर पूरा किया जाए। इस दौरान उन्होंने खजांची चौराहा फ्लाईओवर और जंगल-कौड़िया–जगदीशपुर रिंग रोड के निर्माण की प्रगति का भी जायजा लिया।
गोरखपुर-पिपराइच फोरलेन का विकास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान भारती स्कूल मोड़ पहुंचे। उन्होंने 19.485 किलोमीटर लंबाई वाले इस फोरलेन मार्ग की लेआउट और ड्राइंग मैप का अवलोकन किया। यह फोरलेन 942.44 करोड़ रुपये की लागत से लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड तीन द्वारा बनाई जा रही है। कार्य की शुरुआत 11 फरवरी 2025 को हुई थी और इसे 31 अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और जलजमाव की समस्या से बचाव के लिए पानी की लेवलिंग जांच करने के निर्देश भी दिए।
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जंगल-कौड़िया–जगदीशपुर रिंग रोड का निरीक्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फोरलेन मार्ग के पास बन रहे जंगल-कौड़िया रिंग रोड का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों को इसे सितंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बिशुनपुर अंडरपास की चौड़ाई की समीक्षा करने और जनता को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े, इसका ध्यान रखने के लिए कहा।
खजांची चौराहा फ्लाईओवर का जायजा
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने खजांची चौराहा फ्लाईओवर का भी अवलोकन किया। 96.50 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस फ्लाईओवर का निर्माण 99 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्माण की बची हुई कार्यवाही को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारी
इस मौके पर गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, एमएलसी एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, और जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी भी उपस्थित थे।
सीएम योगी ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय सीमा का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि जनता को शीघ्र सुविधाजनक और सुरक्षित सड़कें उपलब्ध हो सकें।