खून में क्रोमियम बढ़ने पर बढ़ता है कैंसर, खून, किडनी और लिवर का खतरा। जानें हेक्सावैलेंट क्रोमियम के स्वास्थ्य जोखिम और बचाव के तरीके।
हमारे आसपास कई चीजें ऐसी हैं, जो हमारी सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। इनमें से एक गंभीर खतरा है क्रोमियम का बढ़ा हुआ स्तर। इंसानों के खून में क्रोमियम बढ़ने पर यह कई तरह की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
क्रोमियम क्या है और इसके प्रकार
क्रोमियम एक प्राकृतिक तत्व है, जो मिट्टी, पानी, भोजन और हवा में थोड़ी मात्रा में मौजूद रहता है। इसके दो मुख्य प्रकार हैं:
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Trivalent Chromium (Cr III): शरीर के लिए सुरक्षित और कम मात्रा में आवश्यक
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Hexavalent Chromium (Cr VI): बेहद जहरीला, मानव कार्सिनोजन और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
जब शरीर में Hexavalent Chromium का स्तर बढ़ जाता है, तो यह शरीर की कोशिकाओं में जाकर रिएक्टिव ऑक्सीजन पैदा करता है और DNA को नुकसान पहुंचा सकता है। खून में पहुंचने पर यह लिवर, किडनी, फेफड़े और हड्डियों तक प्रभावित कर सकता है।
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खून में क्रोमियम बढ़ने से होने वाली बीमारियां
1. कैंसर का खतरा: IARC (International Agency for Research on Cancer) के अनुसार Hexavalent Chromium एक ग्रुप-1 कार्सिनोजन है। इसका मतलब है कि इंसानों में यह कैंसर पैदा कर सकता है।
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सांस के जरिए एक्सपोज़र: फेफड़े, नाक और साइनस कैंसर
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दूषित पानी के सेवन से: डाइजेशन सिस्टम से जुड़े कैंसर का खतरा
2. खून से जुड़ी समस्याएं: क्रोमियम की अधिक मात्रा से ब्लड सेल्स की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। यह एनीमिया, थकान और शरीर में ऑक्सीजन की कमी का कारण बन सकता है।
3. किडनी और लिवर डैमेज: Hexavalent Chromium किडनी और लिवर में जमा होकर इनके कार्यों को प्रभावित कर सकता है। किडनी की ट्यूब्यूल्स और लिवर की डिटॉक्सीफिकेशन क्षमता कम हो सकती है।
4. फेफड़ों पर असर: क्रोमियम के धूल या धुएं को सांस के साथ लेने पर सांस फूलना, अस्थमा और क्रॉनिक लंग्स की बीमारियां हो सकती हैं।
क्रोमियम शरीर में कैसे बढ़ता है?
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उद्योगों में क्रोमियम धूल या धुएं को सांस के जरिए लेने से
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दूषित पानी या भोजन के सेवन से
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मिट्टी या धातु के संपर्क से
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कुछ मामलों में त्वचा के जरिए