चंद्रग्रहण 2026: 3 मार्च को चंद्रग्रहण, जानें सूतक, खाना और ज्योतिषीय सावधानियां

चंद्रग्रहण 2026: 3 मार्च को चंद्रग्रहण, जानें सूतक, खाना और ज्योतिषीय सावधानियां

चंद्रग्रहण 2026: 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे से चंद्रग्रहण का सूतक शुरू होगा। जानें ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या न करें, खाना कब बनाएं और ज्योतिषाचार्य की सलाह अनुसार राशियों पर प्रभाव।

चंद्रग्रहण 2026: 3 मार्च 2026 को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि संवत 2082 के अनुसार एक खग्रास चंद्रग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार ग्रहण का प्रारंभ भारतीय समयानुसार दोपहर 3:19 PM होगा, मध्य में 5:04 PM और मोक्ष शाम 6:47 PM के समय दिखाई देगा। हालांकि भारत के अधिकांश हिस्सों में ग्रहण प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देगा, क्योंकि यह चंद्रोदय से पूर्व ही प्रारंभ हो जाएगा।

सुबह 6:20 बजे से शुरू होगा सूतक काल

धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के 9 घंटे पहले से सूतक काल प्रभावी हो जाता है। इस वर्ष 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे से सूतक शुरू होगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं, भोजन न पकाने की परंपरा होती है और धार्मिक सावधानियां बरती जाती हैं।

सूतक शुरू होने से पहले ही खाना बना लें और उसमें तुलसीदल डालें।

बच्चों, वृद्धों और रोगियों के लिए ग्रहण से तीन घंटे पूर्व यानी दोपहर 12:20 PM से सूतक मानने की सलाह दी गई है।

भारत में ग्रहण का दृश्य प्रभाव

ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि पर होगा। भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड और मणिपुर में ग्रहण अधिक स्पष्ट दिखाई देगा। अन्य क्षेत्रों में केवल मोक्ष दिखाई देगा। यह ग्रहण यूरोप, एशिया, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में भी देखा जा सकेगा।

  • मार्च 2026 में होली और धुलेंड़ी
  • 2 मार्च 2026: होलिका दहन
  • 4 मार्च 2026: धुलेंड़ी (रंग-गुलाल, मिठाई और शुभकामनाओं के साथ होली उत्सव)

ग्रहण के संयोग के कारण इस बार होली का पर्व धार्मिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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राशियों पर ग्रहण का प्रभाव

मेष: चिंता

वृष: व्यथा

मिथुन: लक्ष्मी कृपा

कर्क: क्षति

सिंह: कष्ट/घात

कन्या: हानि

तुला: लाभ

वृश्चिक: सुख

धनु: मानहानि

मकर: मृत्यु तुल्य कष्ट

कुंभ: स्त्री पीड़ा

मीन: सौख्य

ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें

  • ग्रहण से पूर्व स्नान करें।
  • ग्रहण काल में जप, हवन, मानसिक पूजन, श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व है।
  • गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
  • ग्रहण काल में भोजन, शयन और मूर्ति स्पर्श वर्जित माना गया है।
  • ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान-दान कर पूजा करना शुभ माना जाता है।
  • पवित्र जलाशयों जैसे गंगा, यमुना, सरयू और नर्मदा में स्नान का विशेष महत्व है।
  • दान में अन्न, वस्त्र, गुड़, तेल, तांबे का पात्र, स्वर्ण-रजत आदि दान करने की परंपरा है।

ज्योतिषीय सलाह

आचार्य पंडित सोहन शास्त्री (परमहंसी गंगा आश्रम, झोतेश्वर, मध्य प्रदेश) के अनुसार ग्रहण काल में किए गए मंत्र जाप का फल कई गुना बढ़ जाता है। जितनी अवधि तक जप किया जाए, उतना ही इसका पुण्य फल कई गुना होकर प्राप्त होता है।

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