नवंबर 2025 तक केंद्र का राजकोषीय घाटा 62.3% तक बढ़ा, CAG आंकड़े और विशेषज्ञों की राय के साथ जानें पूरी रिपोर्ट।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 तक केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 9.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तय वार्षिक बजट लक्ष्य का 62.3% है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 52.5 प्रतिशत था। चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्र ने राजकोषीय घाटे का अनुमान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.4% यानी 15.69 लाख करोड़ रुपये रखा था।
राजस्व और व्यय का हाल
नवंबर 2025 तक केंद्र सरकार की कुल आय 19.49 लाख करोड़ रुपये रही, जो बजट अनुमान का 55.7 प्रतिशत है। इसमें शामिल हैं:
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कर राजस्व: 13.94 लाख करोड़ रुपये
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गैर-कर राजस्व: 5.16 लाख करोड़ रुपये
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गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां: 38,927 करोड़ रुपये
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इसी अवधि में केंद्र ने राज्यों को करों में हिस्सेदारी के रूप में 9.36 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए, जो पिछले साल की तुलना में 1.24 लाख करोड़ रुपये अधिक है।
कुल व्यय 29.26 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वार्षिक बजट अनुमान का 57.8 प्रतिशत है। इसमें शामिल हैं:
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राजस्व व्यय: 22.67 लाख करोड़ रुपये (सबसे बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान 7.45 लाख करोड़ रुपये)
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पूंजीगत व्यय: 6.58 लाख करोड़ रुपये (सब्सिडी पर 2.88 लाख करोड़ रुपये का व्यय)
विशेषज्ञों की राय
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में सकल कर राजस्व में बजट अनुमान की तुलना में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की कमी हो सकती है। हालांकि, गैर-कर राजस्व के बेहतर प्रदर्शन और राजस्व व्यय में बचत से इस कमी की भरपाई संभव है। इससे फिलहाल राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से बाहर निकलने का जोखिम सीमित नजर आता है।
CAG के आंकड़े और विशेषज्ञों की राय से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है, लेकिन आर्थिक नियंत्रण और गैर-कर आय के कारण इसे फिलहाल संभाला जा रहा है।