अगर बच्चा अक्सर थका-थका रहता है, सुस्त दिखता है, उसका वजन बढ़ रहा है या ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा है, तो ये Thyroid का संकेत हो सकते हैं। समय रहते जांच और सही इलाज से इस परेशानी को काबू में किया जा सकता है।
बच्चों में Thyroid के लक्षण और कारण
Thyroid की समस्या सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं है, यह बच्चों को भी हो सकती है। कुछ मामलों में बच्चे जन्म से ही Thyroid से प्रभावित होते हैं, जिसे कॉनजेनिटल हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। वहीं कुछ में यह समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है, खासकर ऑटोइम्यून थायराइडिटिस (हाशिमोटो डिजीज) के रूप में, जब शरीर की इम्यून सिस्टम थायराइड ग्रंथि पर हमला करने लगती है।
बच्चों में Thyroid की प्रमुख वजहें हैं:
-
आयोडीन की कमी या अधिकता
-
पारिवारिक इतिहास
-
ऑटोइम्यून समस्याएं
-
कुछ दवाओं के प्रभाव
-
रेडिएशन का संपर्क
बच्चों में Thyroid के प्रकार और संकेत
थायराइड की दो मुख्य अवस्थाएं होती हैं:
-
हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन की कमी):
-
वजन बढ़ना
-
भूख कम लगना
-
ठंड अधिक लगना
-
स्किन रुखी होना, बाल झड़ना
-
कब्ज
-
पढ़ाई में मन न लगना, सुस्ती
-
छोटे बच्चों में दूध पीने में परेशानी और रोने में कमजोरी
-
-
हाइपरथायरायडिज्म (Thyroid हार्मोन की अधिकता):
-
अत्यधिक एक्टिव होना
-
वजन अचानक गिरना
-
भूख बढ़ जाना
-
अधिक पसीना आना
-
नींद की कमी, चिड़चिड़ापन
-
हाथ कांपना, तेज दिल की धड़कन
-
आंखें उभरी हुई लगना
-
इन लक्षणों के आधार पर TSH, T3 और T4 की जांच कराना जरूरी होता है।
बच्चों की Thyroid में क्या खाएं:
-
आयोडीन युक्त नमक
-
दूध, दही, अंडा और पनीर
-
हरी सब्जियां और ताजे फल (सेब, केला, बेरीज़)
-
नट्स और बीज (जैसे बादाम, सूरजमुखी के बीज)
-
विटामिन D के लिए धूप
क्या नहीं खाएं:
-
कच्ची बंदगोभी, फूलगोभी, ब्रोकली (विशेषकर हाइपोथायरायड में)
-
ज़्यादा सोया उत्पाद
-
प्रोसेस्ड और जंक फूड
-
अधिक मीठा और कैफीन
Thyroid से बचाव कैसे करें?
अगर बच्चे में थकान, बढ़ता वजन, सुस्ती या विकास में रुकावट जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेकर तुरंत जांच करवाएं। समय पर इलाज और संतुलित पोषण से बच्चे की सेहत को बेहतर बनाए रखा जा सकता है और थायराइड पूरी तरह कंट्रोल में लाया जा सकता है।