70% ऑटोइम्यून मरीज महिलाएं होती हैं: जानें क्यों महिलाओं में ज्यादा होती है यह बीमारी?

70% ऑटोइम्यून मरीज महिलाएं होती हैं: जानें क्यों महिलाओं में ज्यादा होती है यह बीमारी?

70% ऑटोइम्यून मरीज महिलाएं होती हैं। जानें ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण, लक्षण और महिलाओं में क्यों ज्यादा होती हैं ये बीमारियां। समय पर पहचान और सही इलाज जरूरी।

भारतीय रुमेटोलॉजी एसोसिएशन के IRACON 2025 के 40वें वार्षिक सम्मेलन में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लगभग 70% मरीज महिलाएं होती हैं। भारत में महिलाओं की सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन ऑटोइम्यून बीमारियां अभी भी कम चर्चित विषय हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि महिलाओं की हार्मोनल बदलाव, लाइफस्टाइल और सामाजिक परिस्थितियां उन्हें इन बीमारियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाती हैं। आइए जानते हैं कि ऑटोइम्यून बीमारियां क्या हैं और क्यों महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित होती हैं।

ऑटोइम्यून बीमारियां क्या हैं?

ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही स्वस्थ ऊतकों और अंगों पर हमला कर देती है। इससे जोड़ों, त्वचा, मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं और आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। सामान्य ऑटोइम्यून बीमारियों में रुमेटीइड गठिया, ल्यूपस, हाइपोथायरायडिज्म और सोरायसिस शामिल हैं।

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महिलाओं में ऑटोइम्यून बीमारियां क्यों ज्यादा होती हैं?

  1. हार्मोनल बदलाव: महिलाओं के हार्मोन (जैसे पीरियड्स, प्रेगनेंसी, मेनोपॉज) प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम असामान्य प्रतिक्रिया दे सकता है।

  2. जेनेटिक कारण: अगर परिवार में किसी को ऑटोइम्यून बीमारी है, तो महिलाओं में इसके होने का खतरा बढ़ जाता है।

  3. इम्यून सिस्टम की सेंसिटिविटी: महिलाओं का इम्यून सिस्टम पुरुषों की तुलना में अधिक सक्रिय होता है, जो संक्रमण से तो लड़ता है, लेकिन कभी-कभी शरीर के अपने अंगों पर हमला भी कर सकता है।

भारत में स्थिति क्यों गंभीर है?

भारत में 70% ऑटोइम्यून मरीज महिलाएं हैं, लेकिन ज्यादातर समय महिलाएं लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। बार-बार होने वाली थकावट, जोड़ों का दर्द, त्वचा की समस्याएं या बुखार को अक्सर सामान्य समझा जाता है। साथ ही बढ़ता प्रदूषण, तनाव, खराब खानपान और नींद की कमी इस समस्या को और गंभीर बनाते हैं।

कैसे रखें सावधानी?

ऑटोइम्यून बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही जीवनशैली अपनाएं, तनाव कम करें और संतुलित भोजन लें ताकि आप इस बीमारी से बचाव कर सकें।

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