नई दिल्ली – दिल्ली आबकारी नीति मामले में एक ऐतिहासिक कानूनी और राजनीतिक मोड़ आया है। आज, 1 मार्च 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर आयोजित ‘सत्यमेव जयते’ रैली को संबोधित किया। यह रैली दिल्ली की एक विशेष अदालत द्वारा केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को कथित शराब घोटाले के आरोपों से मुक्त (Discharge) किए जाने के ठीक दो दिन बाद आयोजित की गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री, जिन्होंने जांच के दौरान पांच महीने जेल में बिताए थे, ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंच से विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “झूठ की राजनीति” का चेहरा अब बेनकाब हो चुका है।
“सच्चाई सबके सामने है”
अरविंद केजरीवाल : उन्हें और उनकी पार्टी को बदनाम करने की चार साल लंबी साजिश आखिरकार धराशायी हो गई।”4 साल तक साज़िशें रची गईं, दिल्ली के लोगों से कहा गया कि ‘तुम्हारा बेटा चोर है।’ लेकिन अब अदालत के फैसले ने सच सामने रख दिया। इनकी झूठ की राजनीति बेनकाब हो गई। केजरीवाल कट्टर ईमानदार था, है और रहेगा।”
4 साल तक साज़िशें रची गईं, दिल्ली के लोगों से कहा गया कि “तुम्हारा बेटा चोर है।”
लेकिन अब अदालत के फैसले ने सच सामने रख दिया। इनकी झूठ की राजनीति बेनकाब हो गई।
केजरीवाल कट्टर ईमानदार था, है और रहेगा। pic.twitter.com/CAKrYtkm1f
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) March 1, 2026
अदालत के फैसले के मुख्य अंश
शुक्रवार, 27 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने सीबीआई (CBI) के मामले को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि 2021-22 की आबकारी नीति बनाने में “कोई बड़ी साजिश” या “आपराधिक मंशा” नहीं थी।
अदालत की 600 पन्नों की टिप्पणी में जांच एजेंसियों के रवैये पर कड़े सवाल उठाए गए:
- साक्ष्यों का अभाव: कोर्ट ने कहा कि आगे की कार्रवाई के लिए “लेशमात्र भी सबूत नहीं” हैं और सीबीआई की थ्योरी पूरी तरह से “अटकलों और कल्पनाओं” पर आधारित है।
- गवाहों पर दबाव: फैसले में “सरकारी गवाहों” (Approvers) के बयानों पर अत्यधिक निर्भरता की आलोचना की गई और इसे संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन बताया गया।
- वैधानिक प्रक्रिया: कोर्ट ने माना कि नीति बनाने में उपराज्यपाल (LG) कार्यालय सहित सभी कानूनी परामर्श प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
सियासी गलियारों में हलचल
इस फैसले का समय काफी महत्वपूर्ण है। 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में ‘आप’ को मिली हार के बाद (जिसका मुख्य कारण शराब घोटाला विवाद माना गया था), यह फैसला पार्टी के लिए संजीवनी बनकर आया है।
जंतर-मंतर पर समर्थकों के हुजूम को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा, “उन्होंने मुझे जेल में डाला, मनीष को जेल में डाला, लेकिन वे हमारी ईमानदारी को नहीं तोड़ पाए।” हालांकि, सीबीआई ने इस डिस्चार्ज ऑर्डर के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने के संकेत दिए हैं, लेकिन फिलहाल AAP इसे अपनी सबसे बड़ी नैतिक जीत के रूप में देख रही है।