Sunday, July 26, 2026

Kyunki Saas Bhi Bahu Thi Part 2 : बहू बनाम वधू की यह दिलचस्प टक्कर,समय के साथ रिश्तों ने कितने अलग-अलग रूप ले लिए हैं?

by editor
Kyunki Saas Bhi Bahu Thi Part 2 : बहू बनाम वधू की यह दिलचस्प टक्कर,समय के साथ रिश्तों ने कितने अलग-अलग रूप ले लिए हैं?

Kyunki Saas Bhi Bahu Thi Part 2’ : एक नए अंदाज़ में लौटने जा रहा है। एकता कपूर ने इसके पुराने कलाकारों को फिर से एक मंच पर ला दिया है। वहीं ‘बालिका वधू’ फेम अविका गौर भी अपने मंगेतर के साथ एक नए शो में नजर आने वाली हैं। एक दौर में इनके शोज़ के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा थी। अब देखना होगा कि सालों बाद ये दोनों सितारे दर्शकों की नॉस्टेल्जिया भरी उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं।

पच्चीस साल कोई छोटा वक्त नहीं होता—इस दौरान एक पूरी पीढ़ी बदल जाती है, नई सोच और ताजा दृष्टिकोण लेकर आती है। कोविड के बाद हमारे शब्दकोश में “वैरियंट” जैसा नया शब्द जुड़ा, और फिर आया “नया वैरियंट”। ऐसे ही बदलावों के बीच भी एक शो की यादें आज तक कायम हैं—स्टार प्लस का वह धारावाहिक, जिसने दो दशक पहले आधुनिक परिवेश में पारिवारिक रिश्तों की नई परिभाषा रची थी। तुलसी की मुस्कान और उसके अंदाज़ ने हर घर में अपनी खास जगह बना ली थी। अब वही तुलसी ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में अपने पुराने परिवार के साथ वापसी कर रही है—यह खबर सुनते ही दर्शकों के दिलों में पुरानी यादें फिर से ताज़ा हो गई हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार कौन सा नया “वैरियंट” दर्शकों को अपनी ओर खींच पाएगा।

हालांकि इस नॉस्टेल्जिया की बगिया में केवल तुलसी की ही खुशबू नहीं है। ‘बालिका वधू’ की आनंदी यानी अविका गौर भी अब एक अलग शो में, अपने नए जीवन साथी के साथ, एक नई भूमिका में नजर आएंगी। दिलचस्प बात यह है कि करीब 15 साल पहले दोनों के शोज़ ने दर्शकों के बीच जबरदस्त मुकाबला किया था, और अब फिर दोनों छोटे पर्दे पर वापसी कर रही हैं—अपनी पुरानी पहचान और लोकप्रियता के साथ। निस्संदेह, यह टकराव इस बार यादों को फिर से जीने का मौका देगा। भले ही बीता वक्त लौट कर नहीं आता, लेकिन 2008 के उस दौर की झलक फिर से महसूस जरूर होगी—जब एक ओर विरानी परिवार की बहू की सौम्यता थी, तो दूसरी ओर एक मासूम बच्ची आनंदी की सादगी।

मुस्कान बनाम मासूमियत: किसका रहा पलड़ा भारी?
एक दौर में टीवी पर बहू और वधू की टक्कर ने दर्शकों को दो धाराओं में बांट दिया था। एक ओर स्टार प्लस का ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ था, जिसमें तुलसी की मुस्कान ने हर दिल को छुआ, तो दूसरी ओर कलर्स का ‘बालिका वधू’, जिसमें आनंदी की मासूमियत ने सामाजिक सोच को झकझोर कर रख दिया। तुलसी का किरदार निभाने वाली स्मृति ईरानी न सिर्फ घर-घर में चर्चित हुईं, बल्कि लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि वो राजनीति के मंच तक पहुंचीं। वहीं आनंदी ने समाज में कम उम्र में शादी जैसी कुप्रथा के खिलाफ लोगों को सोचने पर मजबूर किया। अविका गौर की सादगी और अभिनय ने एक नई जागरूकता की शुरुआत की।

नई चुनौतियों के साथ पुरानी पहचान की वापसी
‘Kyunki Saas Bhi Bahu Thi Part ’ ने उस समय एक नई सोच को जन्म दिया था—कि रिश्ते समय और परिस्थितियों के साथ बदलते हैं। अब जब इसका नया संस्करण दोबारा आ रहा है, तो यह तय है कि उसे भी बदले हुए सामाजिक परिवेश में अपनी प्रासंगिकता सिद्ध करनी होगी। पहले जो भावनात्मक और पारिवारिक संकट थे, आज उनका नया रूप सामने है—या कहें तो नया “वैरियंट”। इस शो की लोकप्रियता केवल इसकी कहानी में नहीं, बल्कि उन मूल्यों और आदर्शों में थी, जिनके ज़रिये कॉरपोरेट परिवार की चमक-दमक के बीच भी नैतिकता को दर्शाया गया।

कलर्स की एंट्री ने बदली बाज़ी
समय बदला, और कलर्स चैनल के आगमन ने टीवी इंडस्ट्री में बड़ी हलचल मचा दी। जहां स्टार प्लस ग्लैमर और बड़े घरानों की कहानियों में विश्वास रखता था, वहीं कलर्स ने जमीनी सच्चाई और समाज की वास्तविकताओं पर फोकस किया। ‘बालिका वधू’ जैसे शो ने सीधे दर्शकों के दिल में जगह बनाई और गांव-कस्बों की कहानियों से एक नया दर्शक वर्ग तैयार किया। 2008 में बालिका वधू की शुरुआत के कुछ ही समय बाद क्योंकि सास भी कभी बहू थी बंद हो गया—और यह टीवी की दुनिया में एक बड़ी खबर बन गई।

एकता कपूर की नई पहल और लौटती यादें
अब एक बार फिर से एकता कपूर ने इस यादगार शो को नए रूप में दर्शकों के सामने लाने का बीड़ा उठाया है। पुराने कलाकारों को फिर से एक साथ लाना आसान नहीं रहा होगा, लेकिन स्मृति ईरानी और अमर उपाध्याय जैसे नामों की वापसी से उत्सुकता और भी बढ़ गई है। दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि इस बार कहानी क्या मोड़ लेगी, और क्या पुराने संबंधों की गर्मजोशी दोबारा महसूस की जा सकेगी।

अविका गौर की नई शुरुआत
वहीं दूसरी ओर, ‘आनंदी’ यानी अविका गौर भी अपने मंगेतर के साथ एक नए शो में नज़र आने वाली हैं। दोनों की नई प्रस्तुतियाँ नॉस्टेल्जिया को फिर से जीवित करेंगी या नहीं—यह देखने लायक होगा। आखिरकार, दर्शकों की भावनाओं से जुड़ी ये कहानियां दोबारा वही जादू जगा पाएंगी या नहीं, इसका फैसला दर्शकों की प्रतिक्रियाएं ही करेंगी।

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